Monday, November 10, 2008

अशल खिलाडी - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू

अशल खिलाडी

एकटा देशमे कोचर नामक जादुगर रहे । कोचरकें जादुबाला चमत्कारी शक्तिकें देखकऽ गामक लोक हुनक प्रशंशक बनिगेल रहै । एकदिन कोचर सपनामे एकटा तलवार देखलनि जाहि तलबारमे एकटा अलौकिक शक्ति रहैछ । तलबार प्राप्त करै वाला व्यक्तिके कोनो प्रकारक इच्छा पूर्ण भऽ सकैत अछि । आब, कोचर ओही तलबारके पत्ता लगाबऽ लेलअपन प्रत्येक शक्ति लगादैछैक । अन्ततः ओ एकटा उपाय निकालैय जे ई तलवार राजा गोपाल सिंहक संग्राहालयमे राखलगेल अछि । ओइ तलवारक सुरक्षाके लेल अनेक प्रकार व्यवस्था कएलगेल अछि । आ, ई तलवार एकहि आदमी लाबि सकैय जेकर नाम सरोज खिलाडी थिक । कोचर खिलाडी लग जाकऽ अपन सब समस्या सुनौलनि । खिलाडी ओ तलबार जेनाक होई लाबऽकें लेल मनमे अठोट कैलनि । खिलाडी जखन सब किछ पार कऽ कऽ तलवार वाला कोठरीमे पहुचला त हुनका आगि, पानि आ पाथरि सवकिछ क सामना कऽरऽ परलनि । खिलाडी सामना करैत ओ तलवार प्राप्त कैलाह । जखन ओतऽ सँऽ ओ बाहर निकललनि त ओ एकटा चक्रव्यूहमे फसिगेलाह । निकलऽ कें लेल जखन ओ अकक्ष भऽ गेला तऽ ओतै माथ पर हाथ धऽ कऽ बसिगेलाह । खिलाडी अपन ईच्छा अनुसार रुप बदलिसकैय । मुदा तैंयो निराश भेलाक कारण सँऽ तलवारके भित्तर सँ एकटा चमत्कारी बालक निकललनि आ पुछलनि—"हे खिलाडी जी ! हम आहाँके कि सेवा कऽ सकैछि ?"एकाएक एहन आवाज सुनिक खिलाडी उपर देखलनि त एकटा शुन्दर बालक नजरि परलनि बालक के देखिकऽ खिलाडी पुछलनि –"अपने के छि ?""हम त आहाँक दाशछि । आज्ञा कएल जाँए ।"बालकके एहन नम्रता भरल आवाज सुनिक खिलाडी कहलनि "हम एतऽ सँऽ निकल चाहैत छि ।" एते मात्र बजिते खिलाडी बाहर निकलि गेलाह आ ओ बालक लोप भऽ गेल । तलवार लकऽ खिलाडी कोचरकें घर नहि गेला । ओ सिधा अपन घर पहुँचलनि । ओतऽ खिलाडीक माँ आ बाबुजी तिन दिन सँऽ भोजन नहि कैने रहैथ । जखन खिलाडी पहुचला त हुनको बड जोर सँऽ मुख लागल रहनि । सव गोटा चिन्तामे परल रहैथ । तखने फेर ओ चमत्कारी बालक आएला आ एकटा चौकी पर खुब निकजका सजाओल पकमानक थारी खिलाडीक सेवामे हाजीर कैलाह । एवं प्रकारके जते वातमे हुनका कोनो प्रकारक दिकत होयन त ओ चमत्कारी बालक आविक पुरा कऽ दै । एक दिन खिलाडीक घरक बाट दने एकटा राजकुमारी जातिरहैछैक । ओ राजकुमारी के देखकऽ खिलाडी मोहित भऽ जाइछ आ मनमे अहि राजकुमारी सँ विवाह करऽ कें वात सोचैय । राजकुमारीके देखला वाद खिलाडीक मोनमे एकटा अलग बेचैनी अबैछ ओ जखन तखन मात्र राजकुमारीके बारेमे सोचऽ लगैय । खिलाडी कें सोच मे परल देखिकऽ तलवारवाला चमत्कारी बालक पुनः उपस्थित होइय आ खिलाडीके लेल खुब शुन्दर गहना जेवर सँऽ भरल घर बनादैछ । खिलाडीक बाबुजी खुब बहुते गहना–जेवर लऽ कऽ राजकुमारीक हाथ मांग करऽ लेल तयारी से हो भऽ जाइछ । विवाह से हो बड निकजका सम्पन्न होइछैक । समय एतेक बितला बादो कोचर पिताएले छैक । आ ओ खिलाडीक पत्ता लगाबलेल अनेक प्रकारक बिधाके प्रयोग कऽरहल छैक । बहुतो बिधाक प्रयोग कएलाक बाद ओ खिलाडीक पत्ता लगाबमे सफल भेला । तखन ओ खिलाडीक घर लग एकटा छिट्ठीमे बहुते तलवार लऽकऽ पहुचल आ हल्ला करऽ लागल "पुरान एकटा तलबारके नयाँ दुटा तलबार । "ई बात खिलाडीक माँक कान तक गेलै ओ घरमेका जाँदू बाला तलबार लऽकऽ नयाँ तलबार लेबऽ पहुचैछथी ।कोचरके हाथमे तलबार पैरते कोचर ओतऽ सब तलबार छोरिकऽ गायबभऽजाइय । घरसँऽ तलबार के जाइते खिलाडी पुनः पहिलके स्थितीमे पहुचजाईय । आहे पुरान घर, भोजन करऽमे दिकत आदी ।खिलाडी अपना इक्षानुसार रुप बदलके क्रममे ओ एक दिन कोचरके कनिया बनिकऽ हुनक घरमे पैसलनि । कनियाके देखते कोचर मदिरा देबऽला कहलनि । खिलाडी मदिरा संगैह किछ आर मिलाक कोचरकें पिया देलनि । कोचर बेहोश भऽगेल आ खिलाडी अपन तलबारके खोजमे लागल । तलबार बहुत खोजला बाद भेटलनि । बादमे खिलाडी एहन ढंग सँ ओ तलबारके रखलनि जैके केओ देख नहि सकैय ।

6 comments:

  1. internet par maithili ke jiya kay rakhay bala blog achhi ee, dhanyavad santosh ji, kathmandu aa nepalak aan maithili bhashi ke joru ehi blog se.

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  2. nik lagal ahank katha, etek ras likhait chhi saih bad paigh bat achhi, hamra sabh te sochite rahi gelahu,

    muda khissa kahba me harbari se kaj nahi liya budhiya dadi ke mon pari kay nishinta mon se khissa kahoo,

    ona nik prayas achhi.

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  3. nik prayas achhi, aa nirantar lokpriyata aa badhait pathak sankhya okar parinam, katha kanek aar nik bhay sakait chhal muda kono nahi, bahut nik lagal.

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  4. uttam prayas, ehina likhoo santosh ji, likhait likhai lekhni me chamak aayat, ona ekhno khoob likhait chhi

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  5. nik lagal apan madhesak kathakar ke padhait, muda jiti ji ek page par 7 Ta post rahla se site khujba me late hoit achhi, 4 se beshi ek page par nahi rakhoo, pher old post ke badla me agala aabi rahal achhi se confusion paida kay rahal achhi.

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  6. मार्गदर्शनक लेल बहुत बहुत धन्यवाद राहुलजी अहिना हमर मार्गदर्शन आs लेखकगण केs प्रोत्साहित करैत रहब .....

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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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