Thursday, July 17, 2008

दूध

दूध
प्रथम जनवरी देखल एक,
भोरे-भोर दूधक लेल,
लागि लाइन जखन आयल बेर,
खुशी-प्रफुल्लित पाओल फेर।
मुदा रस्ताक बीचहि खसल दूध,
ओह भेल अपशकुन बहुत।
सुनि खौँजाइ कहल नहि से,
पता नहि शकुने होअय जे।
कहल हँ-हँ शकुने थीक,
माँ पृथ्वीकेँ लागल अर्घ्य,
प्रथमे पायल प्रथमक भोग,
हरतीह सभटा दुःख आ’ रोग।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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