Thursday, July 17, 2008

चोरि

चोरि
गेलहुँ गाम आ’ एम्हर,
आयल फोन,
समाचार चोरिक।
छुट्टी होयबला छल समाप्त,
मुदा चोरक गणना छल ठीक।
आबयसँ एक्के दिन पहिने,
लगेलन्हि घात।
तोड़ि कय केबाड़,
उधेसल घर-बार।
नहि पाबि कोनोटा चीज,
घुरल माथ पीटि।
भोरमे पड़ोसी कएलन्हि डायल सय,
पुलिस आयल हारि थाकि कय।
पड़ोसीसँ किनबाय दू टा अतिरिक्त ताल, (पुलिस महराज अपन घरक हेतु),
चाभी लेलन्हि अपन काबिजमे।
चोर हड़बड़ीमे छल चलि गेल,
मुदा एहि महाशयक हाथ चाभी गेल,
आ’ शो-केशक चानीक नर्त्तकी गुम भेल।
चोरकेँ छल डर गेटक दरबानक,
से छलाह ओ’ गहनाक आ’ नकदीक ताकक।
मुदा पुलिस महाराज दय राब दौब दरबानहुँकेँ,
निकललाह चोरि कय बरजोड़ीसँ।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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