Friday, July 25, 2008

विदेह 15 मार्च 2008 वर्ष 1मास 3 अंक 6 6. संस्कृत शिक्षा (आँगा)

6. संस्कृत शिक्षा (आँगा) सुभाषितम्
वज्रादपि कठोराणि मृदुणि कुसुमादपि। लोकोत्तराणाम चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति।

श्रुतस्य सुभाषितस्य अर्थः एवम् अस्ति। कदाचित महापुरुषाणाम् चेतांसि( मनांसि) वज्रादपि कठोराणि भवन्ति। पुष्पादपि मृदुणि भवन्ति। अतः सुभाषितकारः वदति। कः महापुरुषाणाम् ज्ञातुम् शक्नोति। ज्ञातुमेव न शक्नुमः।

कथा
चन्द्रगुप्तः इति एकः महाराजः आसीत्। सः महाराजः मगधदेशम् पालयति स्म। मगध देशस्य राजा आसीत्। तस्य अमात्यः -चन्द्रगुप्तस्य अमात्यः-चाणक्यः इति। सः बहु विद्वान् निस्पृहः आचार्य आसीत्। यद्यपि सः महाराजस्य अमात्य तथापि सः सरल जीवनयापयति स्म। एकदा चन्द्रगुप्तः चाणक्यम् प्रजाभ्यः दातुम् कंबलम् यच्छति। सः चाणक्यः तस्य कंबलम् कुटीरे नयति। । सः सामान्य कुटीरे वासं करोति। शीतकालः आसीत्। सः कंपति स्म। एकः चोरः मित्रे संग आगतवान्। सः पश्यति। बहूनि धनानि संति। कंबलान् राशिः अस्ति। परंतु चाणक्यः न धृतवान्। सः सुप्तवान् अस्ति। पत्नी अपि सुप्तवती अस्ति। चाणक्य उठापेत्।चाणक्य मुखापेत पृच्छति।भोः। किमर्थम् आगतवन्तः। अनंतरं सः चोरः वदति। शीतकालः अस्ति। निद्रां करोति, कंबलान राशिः अस्ति। तथापि न धृतवान्। चाणक्यः वदति। कंबलानां मदर्थं न दत्तवान। प्राजाभ्याः वितरणम् कर्त्तुम् दत्तवान्। अतः अहम् एतानि कंबलानि न धराम्। तदा चोरः चाणक्यं पृच्छति। भवान् कीदृशः दयालुः।निस्पृहः अस्ति। वयम् इतःपरम् चौरकार्यं न कुर्मः। अतः भवतः सकाशः वयं शिक्षितवन्तः। ते चौरकार्यं त्यक्त्तवा सज्जनः भवन्ति। क्षमाम् याचन्ति। भवतः निस्पृहताम् दृष्ट्वा अस्माकं लज्जा भवति। वयम् इतःपरं चौर्कार्यं न कुर्मः। इति क्षमायाचन्।

पद्य

नृत्यति पुत्तलिका ग्रामे, बालः पश्यति अवैरामे। विहसति, गायति,रोदति सा
यदा सा जीवति बाला। सा अस्ति मनोहरा बाला, अहं इच्छामि पुत्तलिका।
नमोनमः ।
संस्कृतभाषा शिक्षणे भवताम् सर्वेषाम् स्वागतम्। आरम्भे मम परिचयं वदामि। मम नाम गजेन्द्रः।अहं शिक्षकः। भवान वदतु। भवान् कः। भवती का।
भवान् उत्तिष्ठतु। भवान् उपविशतु।
भवान् उत्तिष्ठति। भवती उपविशति। भवंटः उत्तिष्ठन्ति। भवत्यः उपविशन्ति। उपविशति- उपविशन्तु। वदतु- वदन्तु। गायतु- गायन्तु।
अहं एकवचनं वदामि। भवन्तः बहुवचन वदन्तु। नृत्यतु- नृत्यन्ति। अहम् उत्तिष्ठामि।– अहम् उपविशामि। अहं पठामि। वयम् उत्तिष्ठामः। भवन्तः उपविशामः। भवान् गच्छति।– भवन्तः गच्छन्ति। भवती गच्छतु।– भवत्यः गच्छन्तु। सः-ते एषः- एते कः- के तत्- तानि एतत्- एतानि किम्- कानि। अहं गच्छामि। वयं गच्छामः। भवान् गच्छतु-।- भवन्तः गच्छन्तु।
भवती गच्छतु- भवत्याः गच्छन्तु।एतस्य-तस्य(पु.) एतस्याः-तस्याः(स्त्री.) सा ताः एषा- एताः का- काः
गच्छतु- गच्छन्तु।
अत्र कति पुस्तकानि सन्ति। चत्वारि पुस्तकानि सन्ति। हरीशः गणयतु। कति अङ्कन्याः सन्ति। कति पर्णानि सन्ति। षट् पर्णानि सन्ति। कति चमषाः सन्ति। अष्ट चमषाः सन्ति।
पाण्डवाः कति जनाः। पाण्डवाः पञ्च जनाः। कौरवाः कति जनाः। कौरवाः शत जनाः। वर्षे कति मासाः सन्ति। वर्षे द्वादश मासाः सन्ति। मासे त्रिंशः दिनानि सन्ति। पक्षे पञ्चदश दिनानि सन्ति। अत्र त्रिंशत जनाः सन्ति। अत्र कति जनाः सन्ति। त्रिंशत दन्ताः सन्ति। कति दन्ताः सन्ति। एषः दण्डः/हस्तः।
दण्डः हस्ते अस्ति। दण्डः कुत्र अस्ति। एषः आसन्दे अस्ति। एषः स्यूतः।
एतत् धनम्। धनं कोषे अस्ति। वार्त्ता पत्रिकायाम् अस्ति।
स्थालिका/फलं स्थालिकायाम् अस्ति। जलं कूप्याम् अस्ति। अङ्गुल्यकम् अङ्गुल्याम् अस्ति।
वृक्षः- वृक्षे आपणः- आपणे वित्तकोषः- वित्तकोषे विद्यालयः- विद्यालये पुस्तकः- पुस्तके हिमालयः- हिमालये मार्गः- मार्गे आसन्दः-आसन्दे
मन्दिरम्- मन्दिरे नगरम्- नगरे स्थालिका- स्थालिकायाम्
संचिका- संचिकायाम्
पेटिका- पेटिकायाम्
कूपी- कूप्याः घटी- घट्याः अङ्कनी- अङ्कन्याः लेखनी- लेखन्याः]
स्यूते पुस्तकम् अस्ति। वाटिकायां फलम् अस्ति। लेखन्याः मसी अस्ति। नद्याः नीरः अस्ति। इदानीम् अहं शब्दद्वयं वदामि। भवन्तः योजयित्वा/ मिलित्वा वदतु। लखनऊ उत्तर प्रदेशे अस्ति। भोपाल मध्यप्रदेशे अस्ति। मुम्बई महाराष्ट्रे अस्ति। मैसूर कर्णाटके अस्ति। इदानीं भवन्तः एकेकं वाक्यं कथयन्तिवः। कः वदति आरम्भे। शिक्षकः विद्यालये अस्ति। दन्ताः मुखे सन्ति। मम गृहं भारत देशे अस्ति।
भारत देशे कुत्र अस्ति। मम गृहं भारत देशे बिहार प्रदेशे अस्ति। बिहार प्रदेशे कुत्र अस्ति। बिहार प्रदेशे मधुबनी मंडले अस्ति। मधुबनी मण्डले कुत्र अस्ति। मधुबनी मण्डले मेहथ ग्रामे अस्ति। मेहथ ग्रामे कुत्र अस्ति। तत्रैव अस्ति। अहं पञ्चवादने उत्तिष्ठामि। भवान् कदा उत्तिष्ठति। भवान् कदा दंतधावनं करोति। अहं सार्द्ध सप्तवादने योगाभ्यासं करोमि। अहम् अष्टवादने विद्यालयं गच्छामि। भवती कदा विद्यालयं गच्छति।
भवती कदा पूजां करोति। इदानीं कदा इति शब्दम् उपयोज्य प्रश्नं पृच्छन्तु। अहम् उत्तरं वदामि। भवान् कदा पूजां करोति। अहं पञ्चवादने पूजां करोमि। अहं न क्रीडामि। रवीन्द्रस्य दिनचरे अत्र अस्ति। इदानीम् अहं चित्रं दर्शयामि। भवन्तः वाक्यं वदन्तु। रवीन्द्रः पादोन अष्टवादने स्नानं करोति। रवीन्द्रः अष्टवादने अल्पाहारँ स्वीकरोति।
(अनुवर्तते)

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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