Wednesday, July 23, 2008

विदेह दिनांक 15 फरबरी, 2008 (वर्ष: 1 मास: 2 अंक: 4 ) 6. संस्कृत शिक्षा (आँगा)

6. संस्कृत शिक्षा (आँगा)
वयम् इदानीम अति सरलां रम्यां कथां श्रुण्वः। एकाम् कथां वदामि। कश्चन् वृद्धः अस्ति। तस्य शक्तिः नास्ति। जीर्णम् शरीरम् अस्ति। चलितिम् शक्नुम न। सः बुभुक्षितः अस्ति। सः एकम् वनम् गच्छति। वने सर्वत्र भ्रमणम् करोति। खदितुम् किमपि लभ्यते वा इति सर्वत्र भ्रमणं करोति। सः एकंवृक्ष समीपम् गच्छति। वृक्षं पश्यति। उत्तमानि फलानि सन्ति। किंतु फलानि उपरि सन्ति। सः वृद्धः चिन्तयति। फलानि उपरि सन्ति। अहं निस्पृहः अस्मि, कथं प्राप्नोमि। किम् करोमि। इति चिन्तयति। वृक्षः उन्नतः अस्ति। अहं निष्यप्तः अस्मि। आरोहण कर्त्तुम् न शक्नोमि। किम् करोमि। कथं फलं प्राप्नोमि। इति चिन्तयति। वृक्षस्य उपरि वानराः सन्ति। वृद्धः एकः उपायः करोति। एकं शिलाखण्डं स्वीकरोति। शिलाखण्डं उपरि क्षिपति। वनराः कुपितः भवन्ति। फलानि अधः क्षिपन्ति। वृद्धः संतोषेण फलं सर्वम खादति। बहुसंतुष्टः भवति।कथायाः अर्थः ज्ञातवंतः। आम् ज्ञातवंतः। धन्यवादः। नमोनमः।

मम् नाम गजेन्द्रः। भवत्याः नाम् किम्? मम् नाम रमा। भवतः नाम किम्? समीचीनम्।
उत्तिष्ठतु।
आगच्छतु। गच्छतु। रोहित आगच्छतु। रोहितः किम् करोति?
रोहितः गच्छति। रोहितः आगच्छति। उपविशतु। अभिरामः उपविशति। उत्तिष्ठतु। अभिरामः उत्तिष्ठति। सुनीता पिबति। आस्था पिबति।
ओम गच्छति। खादतु।
सा खादति। आस्था खादति। श्रुतिः किम् करोति। श्रुतिः खादति। स्नेहा किम् करोति। स्नेहा पठति। लिखतु। आस्था लिखति। अश्वनी हसतु। आस्था हसतु। आस्था हसति। सुमन्तः हसति। पश्यतु। सुमन्तः पश्यति। प्रियङ्का वदतु। कृष्णफलकं तत्र अस्ति। प्रियङ्का वदति। आगच्छतु। क्रीडतु। आस्था आगच्छति।
क्रीडति।
गच्छति पठति लिखति सः एषः सा एषा भवान भवती
भवान उत्तिष्ठति। भवान उपविशति। भवती लिखति। भवती पठति। अहं गच्छामि। अहं आगच्छामि। अहं उपविशामि। अहं उत्तिष्ठामि। अहं पिबामि। अहं खादामि। अहं क्रीडामि। अहं हसामि। अहं पठामि। अहं लिखामि। अहं वदामि। भवान किम् करोति। अहं पश्यामि। भवान उत्तिष्ठतु। भवान उपविशतु। भवती पठति। भवती पठतु। भवती लिखति। भवती लिखतु। भवती पश्यति। भवती पश्यतु। भवती गच्छति। भवती आगच्छति। भवती उपविशति। उत्तिष्ठति। वदति। लिखति। अहं पठामि। अहं वदामि। अहं पश्यामि। ददातु। किम् करोति। आगच्छतु। आगच्छति। नयतु। मास्तु-मास्तु। ददातु। कृपया उत्तिष्ठतु। एकम् – एकादश
द्वे द्वादश त्रीणि
चत्वारि पञ्चः षट्
सप्त अष्ट नव दश एकादश द्वादश विंशतिः त्रिंशतः चत्वारिंशत्
पञ्चाशत्
षष्टिः सप्ततिः अशीतिः नवतिः शतम्

संस्कृतम् कथं समयः वक्त्तव्यः इति इदानीम् वयं जानीम। पंच वादनम्। कः समयः। षड् वादनम्। अष्ट वादनम्। समयम् अक्षरैः लिखतु। घट्यां समयं दर्शयतु। दश वादनम्। दशाधिक नव वादनम्। पञ्चन्यून दशवादनम्। एकादश वादनम्। सपाद एकादश वादनम्। सपाद पञ्चवादनम्। सपाद अष्टवादनम्। सार्ध सप्तवादनम्। पादोन एकादशवादनम्। एवमेव सार्द्ध दशवादनम्। एक
द्वि
त्रि चतुर्वादनम्
इदानीम् वयम् एकं सुभाषितम श्रुण्वः।
सुभाषितम्

प्रियवाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। तस्मात् तदेव वक्त्तव्यं वचने का दरिद्रता। वयम् इदानीम् यत् सुभाषितम् श्रुतवंतः तस्य अर्थः एवम् अस्ति। यदि वाक्यं वदामः सर्वे जनाः अपि संतुष्टाः भवन्ति। न केवलं जनाः अपितु सर्वे प्राणिनाः अपि संतुष्टाः भवंति। अतः प्रियः वाक्यमेव वदामः। प्रिय वाक्यम् वक्तुम् धनं दातव्यं किमपि नास्ति। प्रिय वाक्य कथने दारिद्रयं कुतः।
सङ्कल्पगानम्

भवतु सफलार्थाः वयम्
भवतु सफलार्थाः वयम्
भवतु सफलार्थाः वयम् एक वासरे....
ओ हो हो, मनसि मे विश्वासः सम्यक्
विश्वासः मे मनसि विश्वासः वयम् एक वासरे....
भवतु शान्तिः सर्वत्र भवतु शान्तिः सर्वत्र
भवतु शान्तिः सर्वत्र
एक वासरे,ओ हो हो..। सन्ति एक-तया वयम्
सन्ति एक-तया वयम्
धृत्वा हस्त-हस्ततलं सन्ति एक-तया वयम्
एक वासरे,ओ हो हो .....
अद्य न अस्ति दरः कस्मात्

अद्य न अस्ति दरः कस्मात्
अद्य न अस्ति दरः कस्मात्
एक वासरे,ओ हो हो....
सिद्धिरस्तु।

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