Saturday, February 23, 2008

आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ


गेल जाड़ मांस के कंपकंपी,
कूदू फान्दू बउवा येऊ,
मादक हवा कही रहल ऐच्छ,
आइबे रहल आइछ फगुवा यौ ॥

रंग-अबीर सं चमकत अंगना,
बल्जोरी के जोर चालत,
दू गिलास भांग के बाद,
बीस ता मल्पूआ यौ॥

नाक-भों जे कियो चढायब,
या की रंग पैइन सं घब्रायब,
जे करतेई बेसी लतपत,
रंग सं भ जीते थौवा यौ..

गोर्की भौजी, छोटका बउवा,
पहिरू पूर्ण अंगा, पुरना नुवा,
रंग-अबीर पोलिस सं,
सब गोते लागब कौवा यौ॥

बड नीक ई पाबैइन आइछ,
सबके मोंन के भाबैईत ऐच्छ,
एके रंग मैं सब रंगेतय ,
के धनीक, के बिल्तौवा यौ॥

फगुवा के यह मज़ा त छाई ,
तैयारी के ने आवश्यकता छाई,
रंग पैइन दुनु छाई सस्ता,
नई खर्चा हित दहौउअया यौ॥
फगुवा के तैयारी करू...

6 comments:

  1. भैया अपने के बहुत - बहुत धन्यवाद जे एतेक सुन्दर होली कविता अपने अई मैथिली ब्लोग पर प्रस्तुत केलो उम्मीद करैत छलो जे अपने के कलम सा और बहुत किछ पढ़ई लs मिलत ! अपने के कविता "आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ" कावीले तारीफ अच्छी !

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  2. priya jeetu,
    shubh sneh. kavita neek laagal , dhanyavaad. mudaa maithili ke shabd translate kariat mein kichh kathinaaee hoet aichh aa hum etek takneekee gapp nahin jainat chhe . yadi kuno galti bha jaay ta samhaarab.

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  3. सरजी अपने के होली कविता (आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ) बहुत निक अछि ! सच पुछू त अपने के कलम के बाते किछ और अछि !

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  4. आत्मासँ हृदयसँ लिखल एहि ब्लॉगक सभ पद्य हृदयकेँ छुबैत अछि।

    গজেন্দ্র ঠাকুব

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  5. गोर्की भौजी, छोटका बउवा,
    पहिरू पूर्ण अंगा, पुरना नुवा,
    रंग-अबीर पोलिस सं,
    सब गोते लागब कौवा यौ॥

    बड नीक ई पाबैइन आइछ,
    सबके मोंन के भाबैईत ऐच्छ,
    एके रंग मैं सब रंगेतय ,
    के धनीक, के बिल्तौवा यौ॥

    फगुवा के यह मज़ा त छाई ,
    तैयारी के ने आवश्यकता छाई,
    रंग पैइन दुनु छाई सस्ता,
    नई खर्चा हित दहौउअया यौ॥
    फगुवा के तैयारी करू...
    eti sundar

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  6. ee blog samanya aa gambhir dunu tarahak pathakak lel achhi, maithilik bahut paigh seva ahan lokani kay rahal chhi, takar jatek charchaa hoy se kam achhi.

    dr palan jha

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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