Monday, February 04, 2008

सात फेरा के सात वचन


इ ब्लॉग हमरा तरफ स हमर

मिथिला युवा बंधू के लेल खाश !!
हर साल अपन मिथिला म हजारो जोरा विवाह के अटूट बन्धन स बनधैत छैथ ! अई शुभ अवसर पर हम सब मिथिला वासी अपन होई बला (जीवन - शाथी) क एक स बैढ़ क एक अनोखा उपहार दैत छलो ! प्रेम आर विश्वास के इ बंधन पवित्र रिश्ता स शुरू होई या ! हमरा सब क़ सोचबाक चाही की अगर हम सब अपन नव विवाहिता क उपहार स्वरुप दी अनोखा सात फेरा के सात वचन जे हुनका बनाबें किछ खाश त कते निक हेत ? सात फेरा हम सब लगबे छी ! अहू आइ नै त कैल लगेबे करब त आओ मन म ठेंन लिया की जहिया आहा सात फेरा लगेब तहिया अपन जीवन शाथी क देवै उपहार स्वरुप सात फेरा के सात वचन ! आहक उपहार स्वरुप सात फेरा के सात वचन अई तरह के भो सके या ?
वचन - १, जीवन पथ पर चलैत - चलैत कखनो अगर कुनू तरहक तकरार पत्नी स हेत त पत्नी क मनाबे के लेल आहा अपन पुरुष अहं दूर रखैत हुनका मनाबे के पूरा कोशिश और अपन गलती माने के बरप्पन देखाबी ! अई स आहा दुनु के बिचक प्रेम दुगुनित हेत !
वचन - २, विवाह के दिन (Wedding Annivarsary) निक जका याद राखी अई स हुनकर (पत्नी) मन जीते म आसानी हेत ! फेर आहा साल भैर जे चाही के सके छी, अनायास आहा क आजादी मिल जेत !
वचन - ३, हम (पति) कखनो इ नै भूली की हम आर हमर नौकरिये सब किछ छी ! योजी महाराज अहाक खाली समय और छुट्टी पर हुनके (पत्नी) के अधिकार छैन !
वचन - ४, एक बात के ख़याल राखल करू की पत्नी के और हुनकर परिवारक सम्मान कारियोंन हुनका किनको सामने अपमानित नै कारियोंन !
वचन - ५, पत्नी आहाके परमेश्वर मनेथ इ उम्मीद नै करेत स्वयं निक इंसान हुनकर दृष्टि म बने के प्रयास करी, ओ अपने के हर ख़ुशी क़ अपन ख़ुशी मनेथ तयो इ कोशिश राखी की हुनका कुन बात स ख़ुशी मिलैत छैन जाने के प्रयाश करी !
वचन - ६, पत्नी अगर अर्धाग्नी कहलाबेत छैथ त हुनका सच्चा दोस्त मानेत हमराज़ बनाबे के प्रयाश कारियों, हुनका स कुनू बात, दुःख, परेशानी नै छुपाबियोंन ! इ कसम अग्नि क साक्षी मानेत खेबाक चाही !
वचन - ७, प्रेम आर विश्वास के इ बंधन एक पवित्र रिश्ता स शुरुवात होइत आइछ, जाकरा सवारे के दायित्व दुनु के होई या अतः कुनू तरहक अहं नै राखेत हुनका सदैव दोस्त मनैत अधिकार आर सम्मान बराबर देबाक चाही !
हम जाने छी इ बात हमर किछ युवा बंधू क पसंद नै हेत तयो अपने स अनुरोध जे इ बात क अपन जिन्दगी म उतैर क देखब ? बाद म देखियो आहा के जिन्दगी कतेक अनमोल बने या !!

8 comments:

  1. badi sundar bat kahlun han
    ham aanha ke aye bat par vichar jarur karbye

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  2. Apnek bat ta bad sunder lag rahal aae. muda ekta bat aach je e kaljug chai e kaljug mein na kiyo ram bha saket chai aa nai kiyo sita. lekin kiyo yadi ram chait ta hunka sita nai bhete chain. aur kiyo yadi sita chait ta hunka ram nai bhete chain. Dosar bat je Ramayan aur mahabharat ke yudh ekta patni ke karan bhel aae. e bat ke hamesa diyan mein rakhu.tahan e 7 vachan ke viyakhya karu ta sobniya hait. Danyabad

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  3. भैया हम अपने के बात स सहमत छी जे रामायण और महाभारत के युद्ध एक पत्नी के कारन भेल रहे ! पर अपने इ किये भूले रहलो या की यदि ओ युद्ध भेल छले त खाली पापी के संघार करे के लेल रामायण और महाभारत यदि नै हेतिये त इ रावण और दुसासन जेहेंन पापी के नास कोना हेतिये ! दुनु युद्ध विधि के विधान रहे पत्नी का ओई म त खाली कारण बनेल गेल या !!

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  4. Dear,

    Bahoot neek kar rahel chi.

    regards.
    S.N. Jha
    http://biharlokmanch.org

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  5. जन मानस परिष्कार मंच

    युग परिवर्तन की यह बेला आपको सपरिवार मंगलमय हो | शिव की शक्ति, मीरा की भक्ति, गणेश की सिद्धि, चाणक्य की बुद्धि, शारदा का ज्ञान, कर्ण का दान,राम की मर्यादा, भीष्म का वादा, हरिश्चंद की सत्यता, लक्ष्मी की अनुकम्पा एवम् कुबेर की सम्पन्नता प्राप्त हो यही हमारी शुभकामना है |

    आपके स्नेहाधीन

    राजेंद्र माहेश्वरी
    पोस्ट- आगूंचा , जिला - भीलवाडा, पिन - ३११०२९ ( राजस्थान ) भारत
    ईमेल personallywebpage@gmail.com
    http://yugnirman.blogspot.com/
    स्वरदूत - 01483-225554, 09929827894

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  6. baDDa nik blog achhi ee

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  7. ee blog samanya aa gambhir dunu tarahak pathakak lel achhi, maithilik bahut paigh seva ahan lokani kay rahal chhi, takar jatek charchaa hoy se kam achhi.

    dr palan jha

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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