Saturday, February 02, 2008

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(मैथिली पुत्र प्रदीप)
१, जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर (मैथिली पुत्र प्रदीप)


जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

जँ माय आहाँ दुख नहिं सुनबई

त जाय कहु ककरा कहबै

करु माफ जननी अपराध हमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

हम भरि जग सँ ठुकरायल छी

माँ अहींक शरण में आयल छी

देखु हम परलऊँ बीच भमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

काली लक्षमी कल्याणी छी

तारा अम्बे ब्रह्माणी छी

अछि पुत्र-कपुत्र बनल दुभर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर !!!


२, लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ


लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

हे माँ गरदनि लगा लिय माँ

हम सब छी धीया-पूता आहाँ महामाया

आहाँ नई करबै त करतै के दाया

ज्ञान बिनु माटिक मुरति सन ई काया

तकरा जगा दिया माँ

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

कोठा-अटारी ने चाही हे मइया

चाही सिनेह नीक लागै मड़ैया

ज्ञान बिनु माटिक मुरुत सन ई काया

तकरा जगा दिया माँ.....

आनन ने चानन कुसुम सन श्रींगार

सुनलऊँ जे मइया ममता अपार

भवन सँ जीवन पर दीप-दीप पहार भार

तकरा हटा दिय माँ.....

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

सगरो चराचर अहींकेर रचना

सुनबई अहाँ नै त सुनतै के अदना

भावक भरल जल नयना हमर माँ

चरनऊ लगा लिय माँ.....

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ


प्रेम स कहू जय मैथिली, जय मिथिला

5 comments:

  1. aapne ke lekhni bad nik ayech

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  2. ee blog samanya aa gambhir dunu tarahak pathakak lel achhi, maithilik bahut paigh seva ahan lokani kay rahal chhi, takar jatek charchaa hoy se kam achhi.

    dr palan jha

    ReplyDelete
  3. Anonymous9:14 PM

    जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर के रचयिता अथवा रचयित्री के थिकैथ
    nagesh03@gmail.com

    ReplyDelete
  4. मैथिली पुत्र प्रदीप

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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